जलडेगा में मंत्री ने जंगल पहुंचकर लाह खेती का लिया जायजा, प्रसंस्करण कार्यशाला में किसानों को किया प्रेरित
अशोक कुमार तिवारी
सिमडेगा। राज्य की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री नेहा शिल्पी तिर्की ने मंगलवार को जलडेगा प्रखंड के कोनमेरला पंचायत अंतर्गत केंदुटोली गांव का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने जंगल में पैदल घूमकर कुसुम के पेड़ों पर की जा रही लाह खेती का निरीक्षण किया। मंत्री ने किसान सुनील तोपनो और विनोद कंडुलना के पेड़ों पर लगी लाह को देखा और किसानों से खेती की विधि, लागत, उत्पादन और मुनाफे की जानकारी ली। उन्होंने किसानों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। मौके पर कोलेबिरा विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी और विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।
इसके बाद मंत्री जयंती उच्च विद्यालय गांगुटोली मैदान में आयोजित एक दिवसीय लाह प्रसंस्करण कार्यशाला में शामिल हुईं। जेएसएलपीएस की महिला दीदियों ने पारंपरिक नृत्य और स्वागत गीत के साथ मंत्री, विधायक और अधिकारियों का स्वागत किया। दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण के बाद कार्यशाला की शुरुआत हुई। विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने भी मंत्री का स्वागत किया।
हाथियों से प्रभावित किसानों के लिए लाह बेहतर विकल्प : विधायक
विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी ने कहा कि कई इलाकों में जंगली हाथियों के कारण किसान पारंपरिक खेती नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे किसानों के लिए लाह की खेती आय का बेहतर विकल्प बन सकती है। उन्होंने कहा कि सिमडेगा जिले को राज्य में सबसे अधिक लाह बीज उपलब्ध कराया गया है, इसके बावजूद अपेक्षित स्तर पर लाह की खेती नहीं हो पा रही है। उन्होंने किसानों से सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर अपनी आय बढ़ाने की अपील की।
धान की तुलना में लाह में अधिक आय की संभावना : मंत्री
मंत्री नेहा शिल्पी तिर्की ने कहा कि गांवों में जाकर जमीनी स्थिति समझने से बेहतर कार्ययोजना तैयार करने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन हमारी धरोहर हैं। इनका संरक्षण करते हुए इन्हीं संसाधनों से ग्रामीणों की आय बढ़ाने के उपाय किए जाने चाहिए, ताकि पलायन को रोका जा सके।
मंत्री ने कहा कि धान की खेती से किसानों को अपेक्षित मुनाफा नहीं मिल पाता, जबकि लाह की खेती से एक कुसुम पेड़ से 50 हजार रुपये तक की आय संभव है। उन्होंने किसानों, विशेषकर महिलाओं और युवाओं से वैज्ञानिक एवं आधुनिक तरीके से लाह उत्पादन का प्रशिक्षण लेने की अपील की। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से निशुल्क प्रशिक्षण और लाह बीज उपलब्ध कराया जा रहा है।
उन्होंने महिलाओं से केवल सरकारी योजनाओं पर निर्भर न रहने और अपनी आय बढ़ाने के लिए स्वरोजगार व कृषि गतिविधियों से जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि गुमला में मड़ुआ की खेती को बढ़ावा मिल रहा है, जबकि सिमडेगा में इसे और विस्तार देने की जरूरत है। सरकार मड़ुआ की खेती के लिए प्रति एकड़ तीन हजार रुपये प्रोत्साहन राशि दे रही है। उन्होंने खाली पड़ी डांढ़ जमीन पर भी खेती करने का आह्वान किया।
पेसा, SIR और KCC को लेकर भी दी जानकारी
मंत्री ने पेसा कानून का उल्लेख करते हुए ग्रामीणों से ग्राम सभा को मजबूत करने की अपील की। परिसीमन और SIR को लेकर उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया महत्वपूर्ण है और जिन लोगों को नोटिस मिला है, वे आवश्यक सुधार जरूर करा लें, अन्यथा मतदाता सूची से नाम हटने की स्थिति बन सकती है।
KCC ऋण के संबंध में उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 से पहले के उन्हीं किसानों के ऋण माफ हुए हैं, जिन्होंने एक-दो किस्त जमा की थी। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने ऋण लेने के बाद कोई किस्त जमा नहीं की और खाता NPA हो गया, उनका ऋण माफ नहीं हुआ है।
कार्यक्रम के अंत में बीडीओ डॉ. प्रवीण कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया। मौके पर कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के जिला व राज्य स्तरीय अधिकारी, प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी, जलडेगा व बांसजोर थाना के पुलिसकर्मी समेत अन्य लोग मौजूद रहे।


















